पुरुषार्थी बनो
आइए दोस्तों। SURENDRASPIRITUALS.BLOGSPOT.COM पर आपका फिर से स्वागत है। आज मैं आपको एक बार पुनः महान तत्वज्ञानी, बीसवीं सदी के महान संत ब्रह्मलीन पूज्यपाद महर्षि मेंहीं परमहंसजी महाराज के अनमोल वचनों से अनुग्रहित करवाता हूं। आशा है आपको इससे कुछ सीखने को मिलेगा। ---------------------------------------------------- "जौं तेहि पंथ चलै मन लाई। जौं हरि काहे न होहिं सहाई।।" जहां आप अपने को बलहीन पाइए तो भगवान को याद कीजिए और अपनी शक्ति लगाइए, अवश्य मदद मिलेगी। एक हनुमान-भक्त था। वह बैलगाड़ी हांकते हुए कहीं जा रहा था। रास्ते में गाड़ी का पहिया पंक में फंस गया। वह गाड़ी पर बैठै-बैठे हनुमानजी को पुकारने लगा------"हे हनुमानजी! हे हनुमानजी! मेरी गाड़ी को पंक से निकाल दो। आर्त पुकार सुन कर एक सज्जन के रूप में हनुमानजी आए और बोले-------"हनुमानजी! हनुमानजी! क्या करते हो? गाड़ी से उतरो, कमर में फेंटा बांधो और पहिए में जोर लगाओ। तब हनुमानजी का बल मिलेगा। वे मदद करेंगे।" वह भक्त गाड़ी से नीचे उतरा और कमर कसकर पहिए में जोर लगाया। परिणामस्वरूप गाड़ी पंक से बाहर निकल गई। ...