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संतों का ज्ञान सतत् स्मरणीय

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नमस्कार दोस्तों....🙏🌹 SURENDRA'S BLOGS में आपका पुनः स्वागत है। आज मैं एक बार फिर से आपको परम संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की अमृतमय वाणी का पान कराता हूं। आशा है आपको मेरा यह प्रयास पसन्द आएगा। धन्यवाद.....🙏🌹 ...........................................................      अवश्य ही संसार में सुकरात एक विशेष व्यक्ति थे। उनका मत वही था जो संतों का है। वे लोगों को शिक्षा देते थे। बहुत लोग उनके पास जाते थे।      कोई बूढ़ी उनके पास अपने पोते को लेकर गई। सुकरात ने पूछा — "इसने कुछ पढ़ा भी है?" बुढ़िया बोली — "पढ़ा तो है लेकिन आपकी विशेष शिक्षा लेना चाहता है।" सुकरात ने कहा — "तो इसके लिए पैसे देने होंगे।" बुढ़िया बोली — "आप तो पढ़ाने के एवज में पैसे नहीं लेते।" सुकरात ने कहा — "जितना पढ़ा है, उसको भुला देने के लिए पैसे मांगता हूं, पढ़ाने के लिए नहीं।"      मतलब यह कि जो ज्ञान पढ़ा हुआ है, वह भूल जाए, बड़ी मुश्किल है। संतों का ज्ञान ऐसा होता है कि वह भुलाने योग्य नहीं। .......................................................