परमात्मा से क्या मांगो?
नमस्कार दोस्तों........🙏🌹. SURENDRASPIRITUALS.BLOGSPOT.COM पर आपका पुनः स्वागत है। हमेशा की तरह एक बार फिर मैं आप सबके सम्मुख 20 वीं सदी के महान संत सद्गुरु महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज की अमृत वाणी को कथारूप में प्रस्तुत करने जा रहा हूं। मुझे आशा है कि मेरा यह सद्प्रयास आप सबको पसन्द आएगा।
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परमात्मा (ईश्वर)
ईश्वर की भक्ति में स्तुति, प्रार्थना और उपासना; तीन बातें होती हैं। इसमें सब संतों के ख्याल का मेल है। स्तुति कहते हैं — बड़ाई करने को, गुणगान करने को। प्रार्थना कहते हैं – नम्रतापूर्वक कुछ माँगने को। सबका हृदय कुछ–न–कुछ मांगता है। क्या मांगो और किससे मांगो? जो बात विशेष फलदायक हो, वह मांगो और जो सब कुछ दे सकें, उनसे मांगो, दूसरे से मांग कर क्या करोगे?
गोस्वामी तुलसीदास
गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है —
देव दनुज मुनि नाग मनुज
सब माया विवश विचारे।
तिनके हाथ दास तुलसी
प्रभु कहा अपुनपौ हारे।।
ईश्वर में सर्वशक्ति है, जिसने सारी सृष्टि को साजा है। सृष्टि नहीं थी, उसने सृष्टि की। कितनी बड़ी शक्ति उसमें है। इसलिए उस ईश्वर से मांगो।
राजा
पहली रानी
दूसरी रानी
एक राजा था जिसको दो रानियाँ थीं। विदेश जाते समय राजा ने उनदोनों रानियों से पूछा — आपलोगों के लिए क्या लावें? एक रानी ने बहुत–सा सामान लाने को कहा और दूसरी रानी ने कहा — "आप विदेश से कुशलपूर्वक मेरे यहां लौट आवें।"
विदेश से लौटने पर पहली रानी को उसके कहे अनुसार सामान देकर राजा स्वयं अपनी दूसरी रानी के महल में चला गया और वहीं रहने लगा। अब राजा की सारी संपत्ति इसी रानी की हो गई।





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